रिकी कहती हैं कि अब दो दिन बाद मैं भी चली जाऊँगी अपने घर रूपा
मेरा बिल्कुल मन नहीं करता की यहां से तुम्हें छोडकर जाऊ तुम्हारी हालत मुझसे देखी नहीं जाती तुम भी चल सकती हो मेरे साथ कुछ दिन के लिए
वहां रहना तुम्हें अच्छा लगेगा अगर तुम्हें हमेशा वहां रहना है तो तुमसे मुझे कोई दिक्कत नहीं मुझे बहुत अच्छा लगेगा मैं तुम्हारे सहेली जैसी हूं मैं तुम्हारी नन्द नहीं हूं सहेली हूं और तुम मुझे जान से भी ज्यादा प्रिय हो
तुमने मेरी बहुत सेवा और मुझे बहुत सम्मान दिया है परंतु जब मेरे भाई ही तुम्हें ना पहचान पाया
तुम्हारे गुणों को ना पहचान पाया
अच्छा मुझसे जो गलतिया हुई हो मुझे माफ़ करना रूपा
रूपा रोने लगती है कहती हैं कि दीदी आपके आने से मैं बहुत खुश रहती थी आप जा रही हो मेरी खुशी जा रही है मेरा दिल बैठ रहा है लग रहा है कि मेरी अपनी बेटी जा रही है
क्रमशः

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