
इंसान को देखो किसी भी प्रकार खुश नहीं रहता बचपन मे अगर खिलौने नहीं है तो उनके लिए बैचैनी होती है अपने पास खिलौने भरे होते हैं परंतु दूसरे की चीजों को देखकर ललचाया करता है वो सोचता है कि मेरे पास वो क्यों नहीं है अपने सुन्दर खिलोनों को छोड़ कर दूसरों के खिलौने खेलने चला जाता है
अपनी पढ़ाई से संतुष्ट नहीं है और ऊंची पढ़ाई या इससे अच्छा कॉलेज होता तो अच्छा होता ये सोचता रहता है
रोजगार मिलता है तो सोचता है कि पैसे बहुत कम मिलते हैं और मिलने चाहिए, ओहदा मिलता है तो सोचता है कि इससे बड़ा ओहदा नहीं है
शादी होती है तो सोचता है कि ये शादी अच्छी नहीं हुई पत्नी मन की नहीं है उसकी पत्नी ज्यादा अच्छी है कुछ दिन और रुक जाता तो इससे अच्छी मिल जाती
अब रहने को घर मिल गया तो ये घर छोटा है अब कुछ दिन बाद बड़ा घर मिल गया तो इसमे धूप और हवा नहीं आती है दम घुटन भरा घर है
बूढ़े माता पिता है तो सेवा करने मे परेशानी है जब मर गए तो भी चैन नहीं है
बच्चों से तकलीफ है बच्चे बहुत बदमाश है पढ़ते नहीं है अब जब पढ़ने चले गए तो अकेलापन खाए जा रहा है
लड़की हो गई तो इसकी जगह लड़की होता तो अच्छा होता
लड़का है अगर उससे कोई दिक्कत है तो लड़की ही अच्छी थी
कभी कभी जो लोग सबसे मुह फेरते है मुंह बनाते है बाद मे उनको कोई पसंद नहीं करता तो वे दुखी हो जाते हैं कि वो अकेले हो गए
इंसान एक ऐसा प्राणी है जो कभी खुश रह ही नहीं सकता
🙏🙏🫢🫢
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