माया की जंजीर

मरने के समय भी ये जंजीर नहीं टूटती जब तक मनुष्य की चेतना रहती है तबतक उसकी माया उसके साथ रहती हैं और शरीर त्यागते समय भी वो यही सोचता रहता है कि उसके बाद उसकी विरासत का क्या होगा कौन खाएगा

आंखे खुली की खुली ही रहती है और वो अभी भी इतने कष्टों से मुक्ति पाना ही नहीं चाहता

दुनिया मे वो इतने कष्ट झेल कर आया अभी भी उसे उन्हीं सब चीजों मे आसक्ति है

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