कितना वही समझदारी से चलो लेकिन कुछ ना कुछ हो ही जाता है

लोग बहुत ही समझदारी से किसी कार्य को पूरा दिमाग लगाकर करते हैं लेकिन कुछ ऐसा होने लगता है कि वे लोग अचंभा करने लगते हैं

प्यार करते थे दोनों एक दूसरे को बहुत

दोनों की जॉब नहीं थी लेकिन वे दोनों एक दूसरे का हाथ थामे चले जा रहे थे

परंतु दोनों सोंचते थे कि कब जॉब लग जाये कब हम दोनों एक दूसरे के हो जाए

किस्मत ने रंग बदला लड़के का जॉब एक अच्छी कंपनी मे लग गया लेकिन लड़की का जॉब नहीं लगा

लड़के के घर वालों ने लड़के के लिए एक लड़की पहले से ही देख रखी थी

और उस लड़के पर दबाव डालकर उसकी शादी पक्की कर दी और कहा कि उस भिखारियों की लड़की से शादी करके तुम्हें क्या मिलेगा इससे शादी करो इकलौती लड़की है तुम्हारा जीवन बदल जाएगा जॉब भी सरकारी करती है ये

लड़का भी माँ बाप की बातों मे आ गया और उसने उस लड़की से शादी करने की सोंच ली

और वो प्रेमिका इंतजार करती लेकिन वो ना आता लेकिन अब उसने भी इंतजार करना बंद कर दिया और एक पेंड पर लिख कर चली गई कि इंतजार कुछ समय तक ही करना चाहिए अब मेरा इंतजार खत्म हुआ मैं अपने जीवन को आगे बढाने जा रही

समय गुजरा उस लड़के की शादी हुई और सुहागरात हुई लेकिन उस लड़के का मन उस पत्नी में नहीं लगा उसने तो शादी पैसों के लिए की थी

बेमन से उस लड़की के साथ शारीरिक संबंध हुए, वो अपने आपको बिकाऊ समझने लगा उसकी हालत भी हो गई थी बिकाऊ जैसी

अब पत्नी अपनी खूबसूरती कायम रखने के लिए अस्पताल मे गर्भपात करवा देती थी अब उसके बच्चे ही नहीं हो रहे थे

घर मे पैसा तो था लेकिन कलह अशांति बहुत थी, लड़की पागलों की तरह हरकत करने लगी, पति पत्नी मे अब मारपीट की नौबत आ चुकी थी

पति रोज पत्नी को पीटने लगा, पूरे पड़ोसी बीच बचाव करने आने लगे तीन साल गुजर गए

अब पत्नी ने कहा कि मैं तुम्हें तलाक देना चाहती हू मैं तुम्हारे घर मे नहीं रहूंगी

और वो अपने मायके चली गई वहां जाकर उसने तलाक के सारे पेपर भेज दिये

जब तलाक के पेपर सबको मिले तो माँ बाप कहते हैं बेटा सुलह कर लो उससे माफी मांग लो

लेकिन बेटे ने कहा अब मैं किसी की बात नहीं मानूँगा और उसने पेपर पर साइन कर दिए और तलाक हो गया

तलाक हो जाने के बाद वो बहुत ही राहत महसूस कर रहा था

अब उसे अपनी प्रेमिका की याद आने लगी वो वही पर अपना समय गुजारने लगा जहां दोनों मिलते थे

वो उसी पेड़ के नीचे चला गया जहा दोनों मिलते थे कभी तो उस पेंड पर उसकी प्रेमिका ने लिखा था कि इंतजार किसी का एक ही सीमा तक करना चाहिए वो समझ गया कि ये उसी ने ही लिखा था जिस समय उसने लिखा था उसकी ता. भी लिखी थी वो जान गया कि उसने मेरा इंतजार किया होगा और मैं उससे मिलने नहीं आया और वो दुखी हुई होगी कितना दिल उसका रोया होगा

उसने अपने आपको बहुत कोसा और पेंड पर अपना सिर रख कर बोला तुम मुझे माफ़ कर दो मुझे माफ़ कर दो

लेकिन अब क्या हो सकता है बहुत देर हो चुकी थी वो घर गया तभी उसने देखा कि उसके पिता जी एक चिट्ठी लेकर चलें आ रहे हैं और कह रहे थे कि बेटा देखो ये क्या है

बेटे ने पत्र खोलकर देखा तो वो दरोगा बन चुका था उसकी नौकरी का बुलावा आ गया था लेकिन खुशी तो उसकी चली गई थी जब उसका प्यार ही नहीं है तो नौकरी की कैसी खुशी

खैर उसने जॉइन कर ली और नौकरी पर जाने लगा

एक दिन पिता ने कहा कि बेटा माँ बीमार है वो अब खाना नहीं बना पाती तीन लोगों खाना बनाने मे ही उसकी हालत खराब हो जाती है तुम्हारे बड़े भाई का फोन आया तो हम लोग उसके यहां चले जाते हैं

ये तो किराए का एक कमरा है वहां पर हमारा घर है तुम इसमे रहो और वो दोनों वहां से चले गए

अब जब भी वो समय पाता था उसी पेंड के नीचे बैठ जाता था

तभी उसका एक दोस्त वहां से गुजरा और बोला आर यार कितने दिनों बाद मिले हो उसने कहा कि कैसे हो बहुत परेशान लग रहे हो तुम

उसने बताया कि वो एक दरोगा है अब उसका तबादला हो जाएगा वहां पर उसे रहने का घर भी मिल जाएगा

और शादी कब करोगे, तब वो अपने दोस्त को सारी बात बताता है

तभी दोस्त कहता है कि यार तुम भी ना, अभी तुम्हारी बहुत उम्र पडी है जीने के लिए मेरी भाभी की छोटी बहन सरकारी स्कूल मे टीचर है बहुत ही अच्छी लड़की है

मैं उससे बात करता हू उसके माता-पिता नहीं है तीन भाई हैं मेरी भाभी और वो दो बहने है

देखो मना मत करना तुम मंदिर मे उसे चुपचाप देख लेना वो भाभी के साथ आएगी

जब तुम्हें पसंद आएगी तब ही बात आगे बढ़ेगी मेरी बात मान लो

उसने हामी भरी और रविवार को वो अपने दोस्त को लेकर मंदिर गया तो देखा कि भाभी अपनी बहन को खोज रही थी कह रही थी कि पता नहीं कहा गई कह रही थी कि दुर्गा माँ के श्रंगार का सामान लेने जा रही और मैं बिछड़ गई

दोस्त ने कहा अरे भाभी कहा गई तुम्हारी बहन

तभी उसने कहा कि बड़ी देर हो गई है अब मैं घर जाता हू तुम्हारी लड़की भाग गई मुझे देखकर और जाने लगा

थोड़ी दूर पर उसने देखा कि उसकी प्रेमिका चली आ रही है कहीं

दोनों ने एक दूसरे को देखा वो थोड़ा सा सकुचाते हुए आगे की ओर जाने लगी लेकिन उसने कहा कि मुझे माफ़ कर दो तब जाओ

प्रेमिका ने कहा कि मैंने तुम्हें कभी बद्दुआ नहीं दी तुम जहां रहो सुखी रहो

तभी उसका दोस्त चिल्लाता हुआ आया और बोला कि यार यही तो भाभी की बहन है तुम कहां गई जाओ भाभी के पास

वो कहती है भैया मैं दुर्गा माँ का सामान लेने गई थी कल से ब्रत हे ना

दोस्त ने कहा कैसी लगी लड़की, अब तो उसका चेहरा खिल गया वो बोला कि उससे उससे पूंछ लेना कि मैं उसको कैसा लगा

मुझे तो पसंद है कोर्ट मे शादी कर लेंगे उसके भैया भाभी आ जाएंगे और तुम आ जाना बस शादी हो जाएगी मुझे कुछ नहीं चाहिए

और शादी पक्की हो जाती है

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