लेकिन वे दोनों दीपेन्द्र की पकड से नहीं भाग सकते थे और अब दीपेन्द्र उन दोनों के ऊपर छलांग लगा चुका था उनमे से एक तो पकडा गया लेकिन दूसरा फिर भाग गया दीपेन्द्र उसे उठाया और दूसरे आदमी के ऊपर उसे फेंक दिया अब दूसरा भी वही पर गिर पड़ा
दीपेन्द्र ने एक बड़ा सा पत्थर उठाया और उन दोनों के सिर पर वार कर दिया खून की धार बह निकली वे दोनों दीपेन्द्र से दया की भीख मांग रहे थे परंतु अब दीपेन्द्र साधारण इंसान नहीं था उसे अब प्यार, दया ,अपना परायी कुछ भी पता नहीं था वो तो खून का प्यासा हो चुका था अब तो जो भी उसके सामने आ जाएगा वो उसे ही खत्म कर देगा
मुझे माफ़ कर दो मैं तुम्हारी मदद करूंगा मुझे छोड़ दो मुझपर दया करो, मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हू मुझे मत मारो
लेकिन दीपेन्द्र को ये सब सुनाई देने वाला नहीं था उसने एक और पत्थर उठाया और उसके मुह मे मार दिया और उसका गला दबा दिया
क्रमशः

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