आखिर वो दिन आ ही गया जब शैल के देखने वालों का संदेश आ गया सब अर्जुन से कहने लगे कि तुम अपने घर मे शैल को दिखा दो तुम्हारा घर अच्छा है हमारे घर मे अनाज और सामान भरा है वहां पर दिखाने का कार्यक्रम ठीक नहीं रहेगा बैठने की भी पूरी जगह नहीं है
अर्जुन राजी हो जाते हैं और शैल को दिखाने के लिए अपने घर की हाँ कर देते हैं वे कह्ते है कि ठीक है भैया आप लोग जैसा उचित समझे
और अब कल ही आने वाले हैं सब
घर की सफाई हो जाती है घर मे पलंग में खूब सुन्दर चादर बिछायी जाती है तकिये रखे जाते हैं नाश्ते ,खाने-पीने का प्रबंध भी करना था शैल को देखने के लिए लड़के के परिवार की महिलाये भी आने वाली थी
अब वो भी दिन आ चुका था सारी भाभियों और दीदी लोगों ने शैल को साड़ी पहनाई और शैल को हिदायत दी कि किसी से बोलना मत जितना पूछा जाए उतना ही उत्तर देना अपनी आंखे नीची करके बैठना
झुक कर बैठना और चलना, ज्यादा हंसना मत किसी से सारी बाते शैल खूब ध्यान से सुन रही थी
अब दोपहर मे ही वो लोग आ भी गए
सबने एक दूसरे को प्रणाम किया, नमस्कार किया और सबकी कुशलता पूछी
क्रमशः

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