सब अपने कर्मों के अनुसार गति को प्राप्त होते हैं

अक्सर देखा गया है कि सभी लोगों की मृत्यु एक जैसी नहीं होती सब अपने अपने कर्मों के अनुसार मृत्यु को प्राप्त होते हैं

कुछ लोग किसी धार्मिक स्थल पर मृत्यु को प्राप्त होते हैं जैसे केदारनाथ मे कितने लोगों ने अपनी जान गंवाई

कुछ लोग प्राकृतिक आपदाओं के चपेट मे आकर मृत्यु को प्राप्त होते हैं

कुछ लोग खाना खाते हुए ही दुनिया से चलें जाते हैं

कुछ लोग लंबी बीमारियां झेलकर मृत्यु को प्राप्त होते हैं

कुछ लोग अपना पूरा जीवन जीकर धरती से जाते हैं

कोई नहीं कह सकता कि उसकी मृत्यु कैसी होगी

अपनी हालत एक कौड़ी की भी नहीं होती है हम सब समय के हाथों की कठपुतलियां है हमे सिर्फ लगता है कि हम बेहतर स्थितियों मे हैं सब हमारे हाथ मे है

लेकिन नहीं हमारे हाथ मे जन्म और मृत्यु कुछ भी नहीं है

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