
आते हैं और जाना भी पड़ता है, जैसे कुछ छूट गया है
कुछ रह गया है चले जाते हैं कुछ
कुछ अपने निशान छोड़ जाते हैं और कुछ सपनों को अधूरा ही छोड़ देते हैं
कुछ सपनो को पूरा करके पूरा जीवन जी कर जाते हैं
कुछ केवल रोते हुए डरते हुए चले जाते हैं
कुछ फिर से आने की तमन्ना लेकर जाते हैं उनका कुछ शायद छुटा हुआ है
कुछ बिखरा हुआ है कुछ समेटना चाहते थे पर
रहे हैं कुछ ख्यालों मे
लेकिन कुछ चले जाते हैं निर्भीक होकर
कहते हैं की सबकुछ पा लिया सबकुछ देख लिया
जो खोना था खो लिया जो पाना था पा लिया
और अब शांत हैं बिल्कुल शांत ना पाने की खुशी ना खोने का डर
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