एक अपने सनम के लिए लिखती हूँ

जीवनसाथी ही मुहब्बत है

तुम ही सहारा ईश्वर ने दी ये अनमोल सौगात मुझे

तुम्हारे उलाहने, तुम्हारी हिदायतें कबूल है मुझे

तुमसे ही मेरी जिन्दगी है

तुम ही मेरी इबादत हो

तुम ही मेरी जिन्दगी

तुमसे पहले क़यामत मुझे छू ले

तुम रहो फूल की तरह महफ़ूज़

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