
हम कुछ भी हारते नहीं हैं जब हम हर परिस्थितियों से मुकाबला करते हुए अपने लक्ष्य को हासिल कर लेते हैं
कोई भी परिस्थिति हमारे अनुरूप नहीं बन सकती अगर हम ये सोंचे की हम जो चाहते हैं वही ही होना चाहिए ये क्यों नहीं हुआ वो क्यों नहीं हुआ
लेकिन वही होता है जो हम नहीं चाहते कि
एक कहानी है
एक लड़के अपने जॉब के लिए बहुत महीनों से कोशिश मे लगा था उसे अपने ऊपर विश्वास था वो जानता था कि उसे नौकरी जरूर मिलेगी उसने नोकरी पाने के लिए हर परिस्थिति का सामना किया
उसने किताबें खरीदने और फॉर्म भरने के लिए मजदूरी की सारे दिन वो काम करता था और रात मे वो पढ़ाई करता था वो सिर्फ 4 घंटे ही सोता था नौकरी के लिए उसने अपना परिवार छोड़ दिया
वो बहुत ही गरीब घर से था भाई के साथ रहता था माँ बाप बूढे हो चुके थे भाई लोग उसकी बड़ी बेइज्जती करते थे अपनी थाली का बचा हुआ खाना उसको देते थे वो एक सरकारी स्कूल मे पढ़ाई करता था
जब वो 10 क्लास पास हुआ तब वो 16 साल का था अब तो उसके पिता का भी देहांत हो गया माँ अब लाचार हो गई थी उसने अपनी माँ से वादा किया कि वो शहर में पढ़ने और नौकरी करने जारहा है और वो शहर मे छोटे मोटे काम करता था
कभी गाड़ी खींचता, कभी मजदूरी का काम करते-करते उसने 12 की पढ़ाई पूरी की
और एक दिन उसने अपने लिए एक पुराना मोबाइल भी खरीद लिया वो दूसरों का मोबाइल देखता तो उसके मन मे विचार आता कि मैं भी अपना नया मोबाइल अपने पैसों से खरीद लूँगा
फॉर्म भरना शुरू किया कुछ लोगों ने उसकी मदद भी की क्योंकि वो भी सबसे बड़े आदर से बात करता था ईमानदार भी था
एक दिन उसकी नौकरी Railway मे लग गई
और जब उसकी नोकरी लग गई तब वो अपनी माँ को के आया Railway से मिले हुए घर मे अपनी माँ के साथ रहता था कभी उसने गलत लड़कों का संग नहीं किया
और उसकी जिन्दगी बन गई एक अच्छी लड़की से उसकी शादी हो गई अब वो गरीब बच्चों को मुफ्त मे समय निकालकर पढ़ाने लगा और उनकी मदद भी करने लगा
अपनी माँ का इलाज भी उसने Railway के अस्पताल मे करवाया
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