
अपने घमंड मे एक मतवाला हाथी था
खूब बड़ा सा शरीर, जब चिंघाड़ता था तो चारो तरह भगदड़ मच जाती थी
जब वो गुस्सा होता था तब वो किसी को नहीं देखता था सब कुछ उजाड़ डालता था
उसने कितनों के घर तोड़ कर लोगों को बेघर कर दिया
कितने परिवार उजाड़ दिए
गुस्से मे वो किसी के बच्चों को भी ना देखता सबको अपने पैरों तले रौंदकर निकल जाता
सब उससे बहुत डरते उसने कितने सारे घरों को उजाड़ दिया था
उसे अब अपने ऊपर घमण्ड भी हो गया था जब शेर, बाघ, खतरनाक जानवर भी उससे डरने लगे
हाथी एक जंगल की हरियाली से होकर जा रहा था तभी वहाँ पर कुछ खरगोश के छोटे छोटे बच्चे खेल रहे थे उसने जोड़ से सूंड उठाई और चिंघाड़ता हुआ आगे बढ़ने लगा वे छोटे छोटे बच्चे थे कुछ समझते ही ना थे
हाथी वहां से नहीं हटा उसको छोटे बच्चों पर भी दया ना आई उसने उन बच्चों को अपने पैरों से रौंदकर आगे की ओर चल पड़ा
सब बहुत परेशान हो गए थे सब लोगों ने वो गाँव ही खाली कर दिया अपने घर दूसरी जगह स्थानांतरित कर लिए
अब तो वो हाथी और भी घमंडी हो गया था वो खूब हरियाली खाता और एक हथिनी के साथ मौज मस्ती करता
उसके बाद उस हथिनी से भी लड़ाई-झगड़े करने लगा अब हथिनी भी अपने बच्चे लेकर वहां से दूसरे स्थान पर चली गई
उसके बच्चे बहुत अच्छे और समझदार थे उनको सब प्यार करते थे वे लोग भी सभी लोगों के अच्छे दोस्त बन गए
कुछ समय के बाद हाथी बूढ़ा हो गया वो एकदम अकेला हो गया था और अब उसके शरीर की शक्ति भी कम होने लगी थी सूंड मे भी दर्द होने लगा था
वो बैठता नहीं था क्योंकि जब वो बैठता तो पलट जाता था और उसका भारी शरीर उठ नहीं पाता था और वो सिर्फ खड़ा ही रहता पेंड के पत्ते भी नहीं तोड़ पाता था
वो बूढ़ा और कमजोर हो गया था और वो बीमार भी रहने लगा था एक दिन वो अचानक नींद के मारे जमीन मे लेट गया उसे नींद आ रही थी और वो इक गहरी नींद मे सो गया
उसे सोते देखकर कुछ गीदड़ वहां से गुजरे और उन्होंने देखा कि ये हाथी तो कमजोर हो गया है सो गया है उठ नहीं सकता अब वो लोग उसका पीछे से मांस नोच नोच कर खा रहे थे लेकिन हाथी गहरी निद्रा मे था
गीदड़ के झुंड का पेट भर गया और वे लोग वहां से चले गए अब कुछ घंटों के बाद जब हाथी की नींद खुली तो उसने दर्द महसूस किया उसका काफी खून निकल चुका था अब वो बिल्कुल भी उठ नहीं पा रहा था
वो बहुत रो रहा था और पछताते हुए कह रहा था कि कोई भी अपना नहीं रहा उसने सबको अपने घमंड भरे बर्ताव से पराया कर दिया
वो समझ गया था कि अब उसकी मौत आ चुकी है उसको चींटियां खाने लगी कौए नोचने लगे लेकिन वो कुछ नहीं कर सकता था सिर्फ दर्द झेल रहा था उसे याद आया कि उसने कितने लोगों को अपने पैरों तले कुचल कर मारा था कितने परिवार अलग किए कितनों को दुख दिया आज ये सब उन्ही पापो का फल है
तभी दूसरे दिन फिर गीदड़ का झुंड आया और कुछ सियार और कुछ जंगली कुत्ते भी उसको अपना आहार बनाने लगे और वो सिसकते हुए रो रहा था लेकिन अब उसका विशालकाय शरीर उसके जीते जी ही सभी का आहार बन रहा था उसने उन दिनों को याद किया जब वो एक खेत उजाड़ चुका था और उस किसान का परिवार भूख से बिलख रहा था और वो उनकी पकी हुई फसलों को खा रहा था
अब तो वो मौत की गुहार लगाने लगा वो प्रकृति से माफ़ी मांग रहा था लेकिन अभी तो बहुत कुछ बाकी था
सब उसे खा रहे थे और चले गए इतनी देर मे कुछ लकड़ बघे वहां आए और उन लोगों ने अब उसके पूरे शरीर को ही नोचने लगे और कुछ ही पलों मे उसके शरीर का बहुत सारा हिस्सा खा लिया जब उसकी गर्दन खाने लगे तभी हाथी के प्राण निकल गए वो हाथी मर चुका था चारो तरह उसकी हड्डियां बिखरी थी उसके मांस को लकड़ बघे चाव से खा रहे थे
घमंडी इंसान का यही हाल होता है जब वो बूढ़ा होता है
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