मजबूर जिंदगी

उछल कर खेलता हुआ, पढ़ने मे इतना तेज था उसका नाम भोंपू था वो छोटा सा था पर उसे संस्कृत के बहुत सारे श्लोक याद थे, छोटा सा था लेकिन रोज पूजा करता मंदिर जाता

फिर अपने भाई बहनो के साथ खूब खेलता था और बहुत मजेदार मजेदार चुटकुले सुनाता

उसका एक बहुत ही अच्छे स्कूल में दाखिला हो गया था और वह मन लगाकर पढ़ाई करता था

हमेशा कक्षा मे अव्वल आता

कभी कभी पूरे स्कूल मे भी अव्वल स्थान पर आता सब लोग उससे बहुत ही प्रसन्न थे

उस स्कूल की पढ़ाई पूरी हुई वो अब बड़ा हो गया था समझने लगा था उसकी मम्मी और एक रिश्तेदार से अवैध संबंध थे वो बरदाश्त करता रहा उसकी बहने भी थी वो सब देखती रहती थी वो विरोध नहीं कर सकती थी क्योंकि अगर वे विरोध करने की जरा सी भी कोशिश करती तो उन्हें बहुत ही मार पड़ती

भोंपू सब देखता, उसके पिताजी जब काम पर चले जाते,उन लोगों की प्रेम लीला शुरू हो जाती घर का सारा काम बिखरा पड़ा होता माँ उसके साथ एक कमरे मे बंद होती और अंदर से दोनों के हंसने अवाज आती

ये सब देख कर भोंपू का मन पढ़ाई से उचाट हो गया वो देखता की दोनों बहने डरी सी बैठी है उसका छोटा भाई आवारा की तरह इधर उधर घूम रहा हैं

खाने को भी कुछ नहीं सिर्फ रोटी बनी रखी है सब्जि और दाल भी नहीं, भोंपू अब विरोध करने की ठान चुका था शायद उसे नहीं मालूम था कि उसका विरोध करना कितना महंगा पड़ सकता है एक दिन उसने विरोध कर दिया

अब क्या था उसकी माँ एकदम शत्रु हो गई थी उसकी उसे एक डंडा लेकर मारने के लिए उठी लेकिन भोंपू ने डंडा पकड़ लिया और वो जो रिश्तेदार कमरे मे घुसा था उसको बाहर निकाल कर आँगन मे ले जाकर 8 डंडा मारे

दोनों बहनो ने भोंपू को रोका था लेकिन भोंपू नहीं माना

उनके पिताजी बहुत सीधे थे वे अपने काम से काम रखते थे 8 बजे जाते और रात मे 9 बजे आते थे वो किसी से ज्यादा बात नहीं करते थे

अब क्या था उसकी माँ ने भोंपू की फीस नहीं जमा की 6 महीने की फीस ना जमा होने पर भोंपू कॉलेज से निकाल दिया गया

परिक्षा का समय आने वाला था अगर फीस न जमा हुई तो भोंपू परिक्षा नहीं दे पाएगा इसलिए वो अपनी माँ के पैर पड़ गया माँ ने कहा कि चुपचाप अपने काम से काम रखो समझे

अब भोंपू की फीस जमा कर दी गई भोंपू 10 क्लास में प्रथम आया लेकिन अब उसका मन पढ़ाई से उचट गया था अब उसे घर मे अच्छा ना लगता

किसी तरह उसने 12 वी क्लास की शिक्षा अपनी बहनो के कहने से पूरी की

वो गलत लड़कों की संगत में फंस चुका था उसकी बड़ी बहन की शादी पक्की हो गई थी माँ ने बहन की शादी बहुत दूर पक्की की थी भोंपू ने अपनी बहन से कहा कि तुम्हें तो मुक्ति मिल रही है इस माहौल से मुझे तो अब इसी माहौल में मरना है

बहन की शादी हो गई अब तो भोंपू पढ़ाई लिखाई छोड़ कर शराब पीने लगा था और माँ से उसकी रोज लड़ाई-झगड़े होते रहते

अब तो वो रिश्तेदार भी वही पर रहने लगा था वो भी भोंपू के ऊपर हावी हो जाता

पिताजी तो देवता थे वो कुछ ना बोलते वो सब जानते थे लेकिन अपनी पत्नी से डरते थे क्योंकि जिस घर मे वो रहते थे वो उनकी पत्नी का ही था मतलब दहेज मे मिला था

रिश्तेदार घर के सारे काम कर देता सब्जियां ला देता, गाय भैस की देखरेख भी करता था

भोंपू अब शराब का आदी हो चुका था उसके दोस्त आते और उसे ले जाते और वो रात मे खूब पीकर आता और गाली देता

रिश्तेदार भी भाग गया

अब उसकी माँ रिश्तेदार के घर चोरी से जाने लगी क्योंकि उसने घर पास ही मे लिया था

शराब पीते पीते भोंपू के टीवी हो गई और भोंपू 5 साल तक तड़पता रहा और बाद मे वो मर गया

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