निशानियाँ और नादानी रह ही जाती है मिटती नहीं

किसी की याद मे खुद को ना जलाया कर

सोते हुए इंसान को सोने दे हिलाकर ना जगाया कर

रुक जा अगर तुझे रुकना है रे पागल मन

किसी के प्यार की आग मे खुद को ना झुलसा ना दिया कर

जो बेखबर है तेरी मोहब्बत को ना समझे उसे तू अपनी याद भूल कर भी ना दिलाया कर

वो डूब चुका है किसी और मस्ती मे तू उसे दरिया के किनारे ना लगाया कर

जाने दे वो तो एक मुसाफ़िर था तू बेबस होकर अपने पास ना बुलाया कर

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