
कंकड आते हैं राह मे, पत्थर आते है कभी कभी भोजन नहीं मिलता कभी-कभी पानी नहीं मिलता सोने और आराम करने ध्यान ही नहीं रहता
माना कि जीवन का कोई ठीक नहीं ये तो कभी भी खत्म हो सकता है परंतु फिर भी हम अपना उद्देश्य क्यों छोडें अपनी राह क्यों बदले
मिलेगी राह, रास्ते के कंकड हमारा आत्म बल साफ़ करेगा हमे एक नया आयाम मिलेगा हमारे उद्देश को प्राण मिलेगा
टिप्पणी करे