किसी से बेवजह समझौते नहीं करने चाहिए
मैं जानती हू की कभी कभी ऐसे हालात उत्पन्न हो जाते हैं कि ना चाह कर भी हमे समझौते करने पड़ते हैं लेकिन हमे उससे दूर होने की कोशिश, एक चुप्पी के साथ करनी चाहिए
जीवन तो हमे जीना ही पड़ेगा लेकिन अब उतना भी नहीं की जिंदगी ही घुटन भरी हो जाती है
मैंने कुछ लोगों को देखा है कि लोग दूसरो कि खुशियो कि खातिर अपनी खुशियो को त्याग देते हैं और ना चाह कर भी दूसरों के लिए समझौते करते रहते है लेकिन फिर भी उन्हें कुछ अपने जीवन के बारे मे भी सोच लेना चाहिए
मैं समझौते नहीं करती हाँ अगर किसी को मेरी जरूरत है तो उसकी सेवा कर दूंगी, अपने शरीर से उसे सहारा दे दूंगी
बच्चे छोटे होते हैं तो माँ बाप का कर्त्तव्य होता है कि अपने बच्चों की आवश्यक वस्तुओं की पूर्ति अपनी औकात के अनुसार करते हैं लेकिन अगर बच्चा आपसे किसी इच्छा की पूर्ति करने की मांग करता हैं जैसे कि उसे महंगा वाला मोबाइल चाहिए, जैसे कि अपने दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने जाएगा, फिल्म देखने जाएगा तो अगर हमारे पर पैसे नहीं हैं तो हम उसे कहा से देंगे अपनी जमा पूंजी तो उसकी बेवजह की खुशियों के लिए खर्च करना तो उचित नहीं होगा हम अपना भी तो कुछ देखेंगे
अगर हम सब सबको दे देंगे तो फिर जरूरत के समय हमे कोई नहीं देगा और हम ये समझौते नहीं कर सकते
हाँ अगर किसी की तबीयत खराब है तो उसकी रातभर जाग कर उसकी सेवा करना समझौते नहीं है अपनी खुशी है
लेकिन अगर मेरे सोने मे अगर कोई मुझे परेशान कर रहा है तो उससे उलझना ही चाहिए
क्यों हमारी किसी वस्तुएं कोई छुएं या हड़पने की कोशिश करे
कोई क्यू हमारे कार्यो मे बाधा डाले मैं क्यों समझौते करूं अपने पैसे मैं किसी को क्यों दूँ
बच्चे बड़े हो गए है उनको पढ़ाया लिखाया और अब उनसे कहो कि वे खुद कमाए
हम उन्हें अपने पैसे क्यों दें हम जन्म के साथी हैं कर्म के साथी नहीं
समझौते बेवजह के करोगे तो सारी जी ना सकोगे और आखिरी समय मे पछताते रहते हैं जब सब दूर हो जाते हैं कोई नजदीक नहीं आता है
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