ये दुनिया भी अजीब है हम खुश रहते हैं तो सबको चिंता होती है कि हम खुश क्यू हैं और जब हम दुखी रहते हैं तो दुनिया सिर्फ पूछती है और पूंछ कर निकल लेती है
लेकिन मैं अपनी तकलीफों को किसी को नहीं बताती अपनी तकलीफें है अपने को ही सहनी है और मैं अपनी समस्याओं को खूब आराम से सुलझा लेती हू और आराम भी पा जाती हू
अब मैं एक उम्र से गुजर रही अब तो मुझे भी ज्ञान हो चुका है कि कुछ भी इस प्रकृति मे ज्यादा दिन नहीं रुकता सब यही पर मिलता है और सब यही पर खत्म हो जाता है
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