देव दासी भाग 523

अब खाना पीना भी शुरू हो जाता है सब खाना खाते हैं हंसी मजाक शुरू हो जाता है और कामिनी अपने कमरे में चली जाती है देखते ही देखते शादी का दिन भी पक्का हो गया था

कामिनी को अपनी किस्मत पर विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उसको बिन मांगे मुराद मिल रही थी मन ही मन वो बहुत खुश थी इतनी खुश उसकी खुशी उससे सहन नहीं हो रही थी उसे डर था कि कहीं उसकी खुशियों मे उसकी ही नज़र ना लग जाए

नाच गाने का प्रोग्राम चल रहा था मुजरा हो रहा था

रंगीनियों का माहौल था सभी ल़डकियों और महिलाओ को वहां पर रुकना मना था सब चली गई थी

सिर्फ गाने हो रहे थे संगीत की अवाज आ रही थी घुँघरू बज रहे थे ल़डकियों के हंसने की आवाजें आ रही थी

ठाकुरों के यहां प्रचलन था कि विशेष कार्यो मे नाचने वाली बुलाई जाती थीं जो उनके सभी शुभ कार्यों सदियो से नाचने आती थी वे ठाकुरों की रौनक थीं क्रमशः

“देव दासी भाग 523” को एक उत्तर

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