रिकी के जाने का समय भी आ चुका था दो दिन के बाद उसे अपने घर जाना था रूपा दुखी थी कि अब रिकी दीदी चली जाएंगी तो अब उसका दुख बांटने वाला कोई नहीं रहेगा
उधर सुनीता भी रिकी के जाने की तैयारियां कर रही थी प्रीति तो रिकी से बात भी नहीं करती थी और ना ही रिकी प्रीति से बात करती थी
अब तो रिकी रूपा के ही कमरे मे रहती थी सुनीता कहती की क्या अब मेरी कोई जरूरत नहीं रही तुम्हें रिकी रूपा ही सबकुछ हो गई
रिकी कहती है नहीं माँ ऐसी बात नहीं है मुझे दो दिन रूपा के कमरे मे रहने दो प्लीज मैं अभी तक तो आपके ही साथ थी कितनी शांति है रूपा के कमरे मे
सुनीता गुस्सा होकर चली जाती है
उधर प्रीति अपने काम पर जाने की तैयारियां कर रही है एक गाड़ी आती है और वो रघु की परवाह किए बिना ही उस गाड़ी मे बैठ कर निकल जाती है
अब रघु का पैर भी ठीक हो चुका है वो भी अब चलने लगा है लेकिन अभी वो पूरी तरह नहीं चल पाता है अभी उसे 15 से 20 दिन ठीक होने में लग सकते हैं
क्रमशः

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