रूह की प्यास

एक रूह की प्यास कभी नहीं मिटती है जब कोई जिंदा रहता है तब उसकी कोई इच्छा शेष रह जाती है और वो किसी इच्छा को पूरी करने के लिए छटपटाता रहता है और जब वो मर जाता है तब उसकी कब्र के आसपास उसकी रूह घूमती रहती है और वो मुक्त नहीं होती वही पर रह जाती है

मैंने कब्रिस्तान मे एक ऐसा ही वाक्या होते देखा है मेरे घर के सामने एक कब्रिस्तान है पहले मेरी शादी नहीं हुई थी मैं गर्मी मे अपनी छत पर सोती थी मेरे पास मेरे भाई बहन ,मम्मी भी सोती थी

मैं अक्सर 12 बजे रात को जाग जाती थी और उसी कब्रिस्तान की तरफ देखती रहती थी कि कैसे सारे लोग सोए हुए हैं उनका भी घर कहीं पर जरूर होगा अपना सबकुछ छोड़ कर ये लोग इस कब्रिस्तान मे अकेले जमीन के नीचे दफन हो चुके है

लेकिन एक दिन मैं गौर से एक कब्र की तरफ देख रहीं थीं कि एक धुएँ की तरह कोई चीज उसमे से निकलती थी और धुएँ की तरह उसके ऊपर घूमती रहती थी

मैं सोचती की ये क्या चीज़ है ये बादल कैसे हैं यहां पर

वो एक बहुत बड़ी कब्र थी वो एक चोर की कब्र थी वो चोरी करता था भीड़ ने उसे बहुत मारा था और वो मर गया था कुछ लोग उसे दफन करके चलें गए थे वो बहुत गरीब था

वो घर बसाने के लिए और शादी करने के लिए चोरी करता था एक लड़की को बहुत प्यार करता था परंतु उस लड़की की शादी कहिं और हो गई थी उसके बाद वो चोरी करते पकडा गया

मुझे उसके बारे मे पड़ोस के भैया से पता चला था

मैंने अपनी नानी से ये बात बताई तो नानी दुखी हो गई और बोली कि इसकी कोई इच्छा अधूरी रह गई और वो बेचारा अपनी कब्र के बाहर धुएँ के रूप मे आ जाता है तुम उसको मत देखा करो

उसके बाद मैंने उसे नहीं देखा लेकिन अब भी मैं उधर से गुज़रती हू तो देखती हू की उसकी कब्र मे बड़े बड़े पेंड निकले हुए है और उसके आसपास बहुत सारी नई कब्रें भी बन गई है

उस कब्रिस्तान को आजतक को तोड़ नहीं सका जो कोई तोड़ने की कोशिश करता है वो बर्बाद हो जाता है

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