एक बहुत पुरानी बात मुझे याद आई
शादी के बाद ससुराल ही अपना घर हो जाता है
मैं भी ससुराल मे रही वही पर सब कहते थे कि अब ये तुम्हारा घर है मायके मे अब तुम्हारा घर नहीं है मायके को तुम्हें भूलना पड़ेगा
लेकिन ऐसा नहीं हो सकता मायके को भी कोई कैसे भूल सकता है
माना कि ससुराल ही अपना घर शादी के बाद हो जाता है पूरा जीवन तो ससुराल मे ही गुजरता है लेकिन मायके मे भी दिन गुजरे थे कभी
मैं भी मायके जाती हू लेकिन उस अधिकार से अब नहीं रह पाती जैसे पहले रहती थी लेकिन ससुराल मे उस अधिकार से रह जाती हू शायद वही ही अपना घर है
अब मायके मे जाती हू तो चाय बनाने के लिए सामान पूंछ लेती हू मायके मे रखी गई वस्तुएं अब याद नहीं रहती कितना बदल जाते हैं सारे लोग
सच मे ससुराल ही अपना घर होता है वही से ही अपना जीवन समर्पित करना चाहिए
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