
लोग सपनों मे ही खोए रहते हैं ये मिल जाए वो मिल जाए किसी ना किसी वस्तु के पीछे भागते हुए अपने अनमोल समय को बर्बाद करते हैं किसी के पीछे ना भाग कर अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए एक छोटी मेहनत रंग ला जाती है
कुछ लोग मेहनत पर नहीं सपनों मे ज्यादा खोए रहते हैं उन्हें मेहनत करनी होगी out उनके सपने तो पूरे होंगे ही उनमे कोई संदेह ही नहीं है लेकिन सिर्फ सपनों मे ही खोना ही अच्छा नहीं है कुछ देर खुद मे भी खोना चाहिए कि आप क्या चाहते हैं आपको क्या चाहिए, खुद अपने मे खोना फिर कोई प्रश्न ही नहीं रह जाता है और ना कोई खोज ही रह जाती है बस मेहनत करने की एक शक्ति का समावेश होता है जो हमारे तुच्छ सपनों से भी बलवान होता है
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