देव दासी भाग 525

कामिनी एकदम डर जाती है कि ये वीर सिंह को क्या हो गया है ये तो मर्यादा का उलंघन है वो अपनी मर्यादा को कैसे तोड़ सकती है अभी तो विवाह भी नहीं हुआ है अभी तो वो वीर सिंह की नहीं हुई और ये कैसे हो सकता है वीर सिंह शायद अपने होश मे नहीं हैं वे कामिनी का हाथ भी पकड़े हुए थे और कामिनी के चुंबन भी लेना चाहते थे लेकिन कामिनी को इसे रोकना होगा

वीर सिंह के मुह से शराब की बदबू भी आ रहीं थीं अब कामिनी ने अपने आपको समर्पित करना अपनी मर्यादा के ख़िलाफ़ समझा वो एक ठाकुर की संतान है ठाकुर की बेटी होने के कारण वो वीर सिंह से कुछ ना बोली लेकिन तभी पीछे से किसी की अवाज सुनाई दी और कामिनी अपना हाथ छुड़ा कर भाग निकली ठाकुर वीर सिंह कहने लगे कामिनी तुम मुझे ऐसी हालत मे छोड़ कर मत जाओ मैं तुम्हारा पति हू कामिनी

लेकिन तभी ठाकुर वीर सिंह की एक चचेरी बहन वहां पर आ चुकी थी वो वीर सिंह को देख कर बोली भैया क्या हुआ भाभी के लिए इतना पागल हो चुके हो और उसने हंसना शुरू कर दिया ठाकुर वीर सिंह ने अपनी आंखे नीची कर ली

वीर सिंह अपनी बहन से बोले कि तुम कब आई

बहन ने कहा भैया आपके पीछे भागते हुए आई आप को सब खोज रहे थे और मैं भी आपको खोजते हुए ही यहां आई हू

क्रमशः

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