
कुछ पलों का ही सही समर्पण भरा साथ होता किसी का हाथ अपने हाथों मे होता कोई कुछ अपनी बातें कहता और कोई मेरी सुनता, कोई मुझे मनाता, मैं उसे मनाती
कितना अच्छा होता जब कुछ यादें याद करने के लिए मुझे भी मिलती मैं भी उन्हें याद करके कुछ मुस्कुराती कुछ हंसती
कोई मुझे महसूस करता ,कोई भी बंधन ना होता कोई भी ऐसा मोड़ तो होता जहां कोई मुझे भी मिलता, मेरा दिल भी फूल की तरह खिलता
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