
कभी कभी ऐसा होता है कि कुछ लोग हमारे जीवन मे आते हैं वे हमारे नजदीक होते हैं बड़े अजीब किस्म के होते हैं उनका बर्ताव समझ मे नहीं आता है
कभी किसी समय वे हमारी बहुत इज्जत करते हैं कभी कभी वे हमे बिल्कुल धो डालते हैं
ऐसे लोगों से अपना बचाव हम करते हैं लेकिन उनकी चपेट मे आ ही जाते हैं और आगे का समय जब बीतता जाता है तब वे तो बदलने नहीं और हम ही बदल जाते हैं
बाद मे ऐसे लोग हमे खुद ही कहते हैं कि तुम पहले से बहुत बदल गई हो तुम पहले जैसी नहीं रहीं
वो लोग मुझे ऐसा क्यू कहते हैं क्योंकि मैं उन लोगों की बातों को नजरअंदाज कर देती हू और उन्हें कोई महत्व ही नहीं देती
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