देव दासी भाग 528

ठाकुर वीर सिंह की पत्नी बनना ही उसके लिए गर्व की बात थी वो अपने आपको बहुत भाग्यशाली समझ रहीं थीं और मन ही मन बहुत खुश थी अब रात होने लगी थी सब खाना खा चुके थे सारा घर खाली हो चुका था और ठाकुर वीर सिंह के सभी परिजन अपने घर जा चुके थे शादी की तारीख भी पक्की हो चुकी थी 18 दिन के बाद शादी थी और सब लोग शादी की तैयारी में जुट गए थे

लेकिन कामिनी को उस समय ही कुछ खटकने लगा था कि वीर सिंह शराब पीकर उस रात को उसके पास क्यों आए थे ये तो उनकी शान के विरुद्ध था कि शादी से पहले अपनी होने वाली पत्नी से इस तरह का बर्ताव करना कामिनी को कुछ अटपटा लगा लेकिन वो कुछ आगे की नहीं सोंच रहीं थीं वो सोंचने लगी कि शायद ये ठाकुरों कि कोई शान ही है ये सब शायद उन लोगों के लिए आम बात थी

शराब पीना और मस्ती तो ठाकुरों के लिए आम बात थी रात को कितना मांस खाया गया था कितने निर्दोष जानवरों को मारा गया था क्या यही ठाकुरों की शान थी

संगीत की अवाज रात को गूँज रही थी पुरुषों के हंसने की अवाज दूर दूर तक सुनाई दे रही थी दूर से महिलाओ के सिसकते हुए शब्द सुनाई दे रहे थे कि ठाकुर साहब छोड़ दो हमे अब कुछ मत करो बहुत दर्द हो रहा है और ठाकुर हंस रहे थे क्रमशः

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