खतरे मेहमान होते हैं बिन बुलाए

मैं पहले बहुत ही डरपोक किस्म की थी जहां मैं खतरा देखती थी वहां से फौरन भाग लिया करती थी लेकिन समय बीतता गया कितना फूंक फूंक कर काम करने वाली एक डरपोक लड़की को कितने सारे खतरों का मुकाबला करना पड़ा जो बिन बुलाए आए थे मैंने सबका मुकाबला भी कर लिया मुझे कोई नुकसान नहीं हुआ हाँ मेरे मन पर बहुत सारे घाव हुए लेकिन उन घावों ने मुझे एक मजबूत और सशक्त महिला मे बदल दिया आज मैं सामने वाले व्यक्ति को देखकर ही उसके अंदर पलने वाली भावनाओ को समझ लेती हू लेकिन समय से कोई जीत नहीं पाता है

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें