जो अपने परिवार को अच्छा जीवन ना दे सके
जो अपने परिवार को या खुद को एक अच्छा रास्ता ना दिखा सका
जो अपने जीवन को खुलकर न जी सका
जो केवल दूसरों मे ही बुराई देखता रहा खुद को भी ना पहचान सका
जो अपने घर की महिलाओं की रक्षा ना कर सका
जो अपना खुद का पेट ना भर सका
जो आलस्य का वशीभूत हो चला
जिसने समय को ना पहचाना
जो अपनी पत्नी को प्यार के दो बोल ना दे सका
जो किसी की आत्मा को राहत ना दे सका
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