सबकुछ परिवर्तनशील है

कुछ भी स्थिर नहीं है ना आप और ना और कुछ यहां तक कि प्रकृति मे भी बदलाव होते हैं और हमारे विचार भी स्थिर नहीं रहते सब कुछ बदल जाता है

यकीन नहीं होता है कि कल वो समय था आज ये समय है

मुझे ये समझ नहीं आता कि लोग अपने दुखों से हार क्यों जाते हैं

उन्हें भी दुखों को झेलने और भूलने की शक्ति मिलती है समयानुसार, बदलाव तो सम्भव ही है

हम समय का मूल्य समझ नहीं पाते अगर हम समय का मूल्य समझें तो वो बदलाव हमे कदापि विचलित नहीं कर सकता

अगर हम प्यार और इंतजार का मुल्य समझे तो ये बदलाव हमे चोट नहीं पहुंचा सकेगा

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