दूसरों को बेवकूफ़ समझने वाले कितने मुर्ख होते हैं

मैंने कुछ लोगों को देखा है कि वे लोग अपने आपको कितना होशियार समझते हैं वे समझते हैं कि ये सबकुछ उनके ही कारण हो रहा है

मैंने उन्हें देखा है कि ये लोग खुद को बहुत महत्व देते हैं दूसरों को केवल उनकी कमियां गिनाते रहते हैं उन्हें ये नहीं पता होता कि जिनको वे लोग आज खरी खोटी सुना रहे हैं कि आज वे उन्हीं लोगों की बदौलत ऊंचे शिखर पर है उन्हीं सबके सहयोग से आज वो बुद्धिमान बने हुए हैं

मैं देखती हू की ये लोग अपने से कमजोर स्थिति वालों लो हमेशा दबाते रहते हैं उन्हें प्रेरणा देने की बजाय उनका मजाक बनाते है लेकिन वे ये भूल जाते हैं कि समय का सब खेल होता है आज समय उनका साथ छोड़ सकता है वे भी टके के हो सकते हैं

“दूसरों को बेवकूफ़ समझने वाले कितने मुर्ख होते हैं” को एक उत्तर

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