देव दासी भाग 534

अब कामिनी वीर सिंह की राह देखती हैं लेकिन इंतजार से पहले ही वीर सिंह कमरे मे दाखिल होते हैं उनके चेहरे पर मुस्कान होती है और वे कामिनी का घूंघट उठाते है और उसका चेहरा देखते हुए कहते हैं कि जैसी चाहिऐ थी मुझे वैसी ही पत्नी मिली उफ्फ्फ कितनी सुन्दर कितनी प्यारी

वीर सिंह की सुर्ख गुलाबी आंखे देखकर कामिनी शर्मा जाती है वो वीर सिंह से आंखे नहीं मिला पाती है

उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि आज वही वीर सिंह उसके सामने उसके पति के रूप मे खड़े हुए हैं जिनको वो अपनी कल्पना मे देखती थी

वीर सिंह उसे अपनी ओर खिंचते हुए कहते हैं अरे अब तो लाज का पर्दा उठाओ मैं तुम्हारा पति हू मुझसे कैसी शर्म लो देखो मैं तुम्हारे लिए कुछ लाया हू आज

माँ ने मुझसे कहा था कि तुम्हें कुछ उपहार देना चाहिए और देखो इधर

कामिनी अपने चेहरे को उठाकर देखती है तो एक बहुत ही सुंदर हीरो का सेट और पायल वो भी कितनी सुंदर

वीर सिंह कहते हैं कि ये सब कल नहाने के बाद सुबह पहन लेना और सबसे पहले माँ के पैर छू लेना क्रमशः

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