दीपेन्द्र सबको मारकर एक तरफ बैठ गया और वो बहुत शिथिल हो चुका था उसकी आंखे लाल हो चुकी थी उसके मुह से झाग निकलने लगा था लेकिन वो अब भी बहुत गुस्से मे था
उसने फिर से एक बहुत बड़ा सा पत्थर उठाकर फेंका था जो बहुत दूर गिरा था
अब वो लड़की भी उसे देखकर परेशान हो गई थी वो एक झाड़ी के पीछे छिपी हुई थी वो दीपेन्द्र के पास आना चाहती थी लेकिन वो दीपेन्द्र से भी बहुत डर रहीं थीं क्योंकि दीपेन्द्र ने उसे बाहर निकलने को मना किया था
वो जानती थी कि दीपेन्द्र अपने होश में नहीं है वो जानती थी कि दीपेन्द्र परेशान है
जब दीपेन्द्र एक तरफ बैठ गया और बड़े बड़े पत्थर उठा कर फेंक रहा था तब वो जानती थी कि दीपेन्द्र को कोई मानसिक रोग है कोई भी इंसान इतना ताक़तवर कभी नहीं हो सकता था क्रमशः

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