देव दासी भाग 535

महलों में रहने वाली देखने मे बहुत ही खुशनसीब लगती है लेकिन इनके अंदर का दर्द कोई नहीं जानता कामिनी को शायद एहसास ही नहीं हुआ कभी कि दर्द क्या होता है

वीर सिंह कामिनी से कहते हैं कि तुम्हें जो अवसर मिले हैं वे हमारे यहा सभी महिलाओ को मिलते हैं हमारे घर की महिलाओं को उचित सम्मान दिया जाता है तुम अभी अभी आई हो तुम खुद ही अपनी किस्मत पर नाज़ करोगी जैसे कि एक ठाकुर की पत्नी करती है तुम्हारा रुतबा ही अलग होगा

तुम ठाकुर वीर सिंह की धर्म पत्नी हो जिसके लिए कितनी लड़कियां तरस कर चली गई और कामिनी को अपनी तरफ खींच लेते हैं

कामिनी को ठाकुर वीर सिंह का ये बर्ताव अच्छा नहीं लगता वो सोचती है कि क्या प्रथम मिलन का यही अर्थ होता है

वीर सिंह तो वासना के वशीभूत हो जाते हैं और कामिनी को भी उनके आगे समर्पण करना ही पड़ता है अखिरकार वो है तो ठाकुर वीर सिंह की पत्नी

कमरे के सारे अनमोल दिए ठाकुर वीर सिंह बुझा देते हैं कमरे मे अंधेरा हो जाता है ठाकुर वीर सिंह कहते हैं कि अब हमे कोई नहीं देख रहा है ये अनमोल समय तुम्हें मिला है इसे मत गवां दो कितनी लड़कियां मेरे साथ ये क्षण बिताने के लिए पागल रहती है

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