वीर सिंह कामिनी से कहते हैं कि तुम्हें जो अवसर मिले हैं वे हमारे यहा सभी महिलाओ को मिलते हैं हमारे घर की महिलाओं को उचित सम्मान दिया जाता है तुम अभी अभी आई हो तुम खुद ही अपनी किस्मत पर नाज़ करोगी जैसे कि एक ठाकुर की पत्नी करती है तुम्हारा रुतबा ही अलग होगा
तुम ठाकुर वीर सिंह की धर्म पत्नी हो जिसके लिए कितनी लड़कियां तरस कर चली गई और कामिनी को अपनी तरफ खींच लेते हैं
कामिनी को ठाकुर वीर सिंह का ये बर्ताव अच्छा नहीं लगता वो सोचती है कि क्या प्रथम मिलन का यही अर्थ होता है
वीर सिंह तो वासना के वशीभूत हो जाते हैं और कामिनी को भी उनके आगे समर्पण करना ही पड़ता है अखिरकार वो है तो ठाकुर वीर सिंह की पत्नी
कमरे के सारे अनमोल दिए ठाकुर वीर सिंह बुझा देते हैं कमरे मे अंधेरा हो जाता है ठाकुर वीर सिंह कहते हैं कि अब हमे कोई नहीं देख रहा है ये अनमोल समय तुम्हें मिला है इसे मत गवां दो कितनी लड़कियां मेरे साथ ये क्षण बिताने के लिए पागल रहती है
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