रात भर वीर सिंह ना खुद सोते है ना कामिनी को ही सोने देते हैं कामिनी सोचती है कि अब वो कहा भागे भाग भी नहीं सकती अब तो वो एक बंधन मे बंध चुकी किसी की पत्नी बन चुकी
वो तो सोंच भी नहीं सकीं की इतने शांत और सीधे दिखने वाले ठाकुर वीर सिंह का ये रूप
लेकिन अब क्या हो सकता है प्यार के तो सिर्फ दो बोल उससे ठीक से बात भी नहीं की ठाकुर वीर सिंह ने
अब सुबह हो चुकी थी ठाकुर वीर सिंह अपनी वासना को शांत करके खूब आराम से खर्राटे मारकर सो रहे थे और कामिनी थकी हुई सी लूटी गई थी वो उसे एहसास हो रहा था कि शायद ठाकुरों की पत्नियों की यही इज्जत होती है
वो अपने आपको ठीक करती है उसके गोरे बदन पर नीले नीले निशान
उसके गोरे चेहरे पर लाल लाल दांतों के निशान वीर सिंह पान खाकर आए थे और वे कामिनी के,,,
कामिनी ने अपना चेहरा अपने हाथों से ढक लिया अब तो वो बाहर जाने लायक भी नहीं रहीं सब मुह देखेंगे तो क्या सोचेंगे
क्रमशः

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