देव दासी भाग 536

एक पत्नी ना चाहते हुए भी जब अपने आपको अपने पति के आगे समर्पित करती है तब भी वह अपने आपको खुश किस्मत मान रहीं है ऐसी ही ठाकुरों की पत्नी का यही सम्मान है जैसे कि कामिनी का

रात भर वीर सिंह ना खुद सोते है ना कामिनी को ही सोने देते हैं कामिनी सोचती है कि अब वो कहा भागे भाग भी नहीं सकती अब तो वो एक बंधन मे बंध चुकी किसी की पत्नी बन चुकी

वो तो सोंच भी नहीं सकीं की इतने शांत और सीधे दिखने वाले ठाकुर वीर सिंह का ये रूप

लेकिन अब क्या हो सकता है प्यार के तो सिर्फ दो बोल उससे ठीक से बात भी नहीं की ठाकुर वीर सिंह ने

अब सुबह हो चुकी थी ठाकुर वीर सिंह अपनी वासना को शांत करके खूब आराम से खर्राटे मारकर सो रहे थे और कामिनी थकी हुई सी लूटी गई थी वो उसे एहसास हो रहा था कि शायद ठाकुरों की पत्नियों की यही इज्जत होती है

वो अपने आपको ठीक करती है उसके गोरे बदन पर नीले नीले निशान

उसके गोरे चेहरे पर लाल लाल दांतों के निशान वीर सिंह पान खाकर आए थे और वे कामिनी के,,,

कामिनी ने अपना चेहरा अपने हाथों से ढक लिया अब तो वो बाहर जाने लायक भी नहीं रहीं सब मुह देखेंगे तो क्या सोचेंगे

क्रमशः

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