अब अर्जुन नीलू को लाने का विचार करते हैं वे शैल से कहते हैं कि तुम्हारी भाभी को लाने जा रहा हूं मैं परसों
परसों मेरी छुट्टी भी है अभी उन दोनों को गए एक महीना हुआ है
कल्लू का भी कहिं पता नहीं है
शैल कहती हैं कि भैया मौसी भेजेगी भाभी को वही बुढ़िया तो लेकर गई अगर वो ना आई होती यहां तो ये सब ना होता वही सब करवाती है
वही भाभी को सब उल्टा सीधा सिखाती रहती है
तुम्हारा लड़ाई-झगड़े उसी के कारण हुआ है भैया लेकिन उससे अच्छी तरह और प्यार से बात करना
आप भाभी को लेने जा रहे हो अपने आप वो बहुत भाव खाएगी अभी
अर्जुन कहते हैं कि क्या करूं मैं तो उसे लेने ना जाता लेकिन अपना काम है इसलिए मैं लेने जा रहा हूं
वर्ना मैं तो उसे कभी लेने ना जाता वो अपनी बेटी के लिए मेरे आगे घुटने टेक देती
क्रमशः

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