बेबसी की मारी भाग 273

निर्दयी लोग किसी की कीमत तब जानते हैं जब उन्हें किसी की जरूरत होती है

अब अर्जुन नीलू को लाने का विचार करते हैं वे शैल से कहते हैं कि तुम्हारी भाभी को लाने जा रहा हूं मैं परसों

परसों मेरी छुट्टी भी है अभी उन दोनों को गए एक महीना हुआ है

कल्लू का भी कहिं पता नहीं है

शैल कहती हैं कि भैया मौसी भेजेगी भाभी को वही बुढ़िया तो लेकर गई अगर वो ना आई होती यहां तो ये सब ना होता वही सब करवाती है

वही भाभी को सब उल्टा सीधा सिखाती रहती है

तुम्हारा लड़ाई-झगड़े उसी के कारण हुआ है भैया लेकिन उससे अच्छी तरह और प्यार से बात करना

आप भाभी को लेने जा रहे हो अपने आप वो बहुत भाव खाएगी अभी

अर्जुन कहते हैं कि क्या करूं मैं तो उसे लेने ना जाता लेकिन अपना काम है इसलिए मैं लेने जा रहा हूं

वर्ना मैं तो उसे कभी लेने ना जाता वो अपनी बेटी के लिए मेरे आगे घुटने टेक देती

क्रमशः

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