शादी का असली मतलब भाग 279

विवाह एक समझोता नहीं है ये दो दिलों का मिलन है लेकिन कहीं ना कहीं कुछ लोग इसे ज़बर्दस्ती भी निभाते हैं

रिकी अब जाने वाली है रिकी का भी अब घर से फोन आ रहा था उसके भी बच्चे है जो अब बड़े हो चुके हैं रिकी दो तीन साल मे एक बार ही अपने मायके आ पाती है

रिकी के पति बहुत ही अच्छा व्यावसाय करते हैं घर मे किसी चीज की कमी नहीं है रूपा रिकी से कहती है कि दीदी आपका जाना मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा आप मुझे फोन करती रहना

आज रात की रिकी की फ्लाइट भी है और आज उसे जाना है

रघु का पैर भी अब ठीक हो चुका था और वो और प्रमोद रिकी को छोड़ने जाने वाले थे

प्रीति को तो अपने ऑफिस से फुर्सत नहीं मिलती है रघु अब ऑफिस जाने लगेगें

रूपा को अब फिर अकेलेपन का डर सताने लगा था

सुनीता रिकी के जाने की तयारी कर रहीं थीं उसके मनपसंद खाने की पैकिंग, उसके बच्चों के लिए भी उपहार पैकिंग कर रहीं थीं

क्रमशः

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