लेकिन ये क्या वो लड़की तो चली गई थी
कामिनी को अपने रूप पर गर्व हो रहा है कि ठाकुर वीर सिंह उसकी सुंदरता पर मोहित थे परंतु उस लड़की की एक बात उसके दिल मे हलचल उत्पन्न कर देती है
कि मन भरने तक ही ठाकुर वीर सिंह का प्यार है तो क्या उसके बाद ठाकुर वीर सिंह उसको महत्व नहीं देंगे
नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता वो तो पत्नी है तभी उसे वीर सिंह की आहट सुनाई देती है उनके जूतों की अवाज कामिनी के मन में उमंग भर देती है
आज उसका दूसरा दिन था
वो समझ चुकी थी कि वीर सिंह उसके प्यार मे लुट जाना चाहते हैं तो क्यों ना वो भी वीर सिंह के प्यार मे डूब जाए
अब वीर सिंह उसके पास आते हैं और उसे अपनी बाहों का सहारा देकर अंदर ले जाते हैं और उसे अपनी गोद मे उठा लेते हैं और कहते हैं कि डरती हो अपने पति से
ये तो अनमोल घड़ी है बार बार नहीं मिलेगी तुम्हें कुछ समय के लिए इन् घड़ियों मे डूब जाओ
और थोड़ी देर तक वो ठाकुर वीर सिंह की आँखों मे देखती रही उनकी बड़ी बड़ी आँखों मे वो सम्मोहित होती चली गई और ना जाने कब वो वीर सिंह मे खोती ही चली गई क्रमशः

टिप्पणी करे