देव दासी भाग 542

कामिनी कोई अकेली नहीं थी जो ये सब झेलती लेकिन उसे अब इसमे ही रहना था अखिरकार वीर सिंह उसके पति थे

कामिनी अब राहत की साँस पा चुकी थी वो जल्दी जल्दी नहाने के लिए जा रहीं थीं तभी उसकी सास आईं और बोली कि इतनी देर लगा दी तुमनें

इतनी देर सोने की आदत है तुम्हारी अब तो ये आदत तुम्हें बदलनी होगी माना कि तुम अपने घर की इकलौती लड़की हो और बहुत ही प्यार मे पली हो

जाओ अच्छा अब मेरा मुह मत तक नहा कर जल्दी आओ

लोग तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं

कामिनी अब नहाने चली गई थी

श्रंगार करने के लिए जब वो शीशे के सामने खड़ी हुई तो उसने देखा अपने रूप को की उसका रूप कुछ फीका सा लग रहा था मन मे डर बैठ गया था

एक संकोच और उसकी इच्छाओं का पतन हो चुका था

क्रमशः

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