
जब भी मन करता था मैं समोसे पास की एक दुकान से ले आती तब मेरी शादी नहीं हुई थी समोसे वाले चाचा खूब चटनी डालकर समोसे देते
उनकी बहू भी उनके साथ समोसे बनाती
वे लोग सारे दिन परिवार के साथ समोसे बना कर बेचते
सड़क पर छोटी सी दुकान थी लेकिन साफ़ सुथरी थी एक पत्ते मे चाचा समोसे देते थे
सब लोग उनके समोसे खूब खाते और घर भी ले जाते
लेकिन रोज एक पागल लड़की भी आती और चाचा उसको भी एक समोसा दे देते
एक बछड़ा भी आता था उसको भी रोटी दे देते
कुछ चिड़िया भी आती थी उनको भी वो दाना खिला देते
एक कुत्ते को भी चाचा समोसा दे देते
मतलब कि उस छोटी सी दुकान मे भी एक दुनिया थी
कुछ दिनों के बाद चाचा की दुकान मे बहुत भीड़ होने लगी अब तो सब लाइन लगाकर समोसा खरीदने लगे
चाचा के चेहरे पर एक उत्साह और खुशी रहती थी
वे अब भी उसी तरह मुस्कुराते थे
मैं जब कॉलेज जाती तो टिफिन मे समोसा रख लेती थी और कहती चाचा नमस्ते
चाचा कहते खुश रहो बिटिया
अब कुछ दिनों के बाद मेरी शादी हुई
अब चाचा मेरी शादी मे बिना बुलाए आ गए
उन्होंने मेरे पास आकर मेरे सर पर हाथ फेरा और मुझसे कहा बिटिया ससुराल मे खूब काम करना मेहनत की खाना आराम की ना सोचना
और मैं ससुराल मे खूब काम करती
मेरे बेटा हुआ था लेकिन चाचा नहीं आए
मैं सोंचने लगी कि चाचा नहीं आए
पूछा तो पता चला कि पुलिस वालों ने चाचा की दुकान वहां से हटा सी अब वहां पर फ्लाइओवर बनेगा
चाचा अपने गाँव चले गए थे लेकिन वहां भी उन्होंने दुकान खोल ली थी
चचा की तरह समोसे आजतक खाने को नहीं मिले
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