कामिनी की जिंदगी अब कामिनी समझ चुकी थी कि अब उसके साथ क्या होने वाला है वीर सिंह का मन जब भर जाएगा तब उसका क्या होगा कामिनी भलीभांति जानती थी
लेकिन वो अपने आपको उस तरह ढाल लेना चाहती थी कि बाद मे उसे दुख ना हो कल उसके बड़े भैया उसे लेने आने वाले थे उसे उसकी खुशी भी थी
वो मंदिर जाने के बाद तैयार होती है कुलदेवी के मंदिर जो बहुत ही पुराना मंदिर था सारी बहुएं उस मंदिर मे पूजा अर्चना के लिए जाती है और वहां का एक माला जो उसे जीवन भर अपने पास रखना पड़ता था और जब भी पूजा या व्रत होता था तब वो माला पहन कर मंदिर आना पड़ता था वो माला ठाकुरों की बहू होने की एक निशानी थी
अब जब कामिनी अपनी सास के साथ जाने के लिए तैयार होती है और सास बताती हैं कि माला की किस तरह से देखरेख और कदर करनी पड़ती है
मंदिर मे पुजारी जी और भी ठाकुरों की पत्नियाँ बहुएं वहां पर जमा होती है तो वहां उसे गीता नाम की एक लड़की भी मिलती है वो कामिनी को देखकर कहती हैं कि ये वीर भैया वाली भाभी है ना कितनी सुन्दर है आज तो अच्छा दान और पैसा भैया से लुंगी
कामिनी गीता को देखकर मुस्करा देती है शांति कहती हैं कि अच्छा ले लेना जितना मन हो
और वो गीता को पैसा देने लगती है लेकिन गीता कहती हैं कि भैया से पैसे लुंगी लेकिन पहले लड़ाई करूंगी मैं की मुझे शादी मे क्यों नहीं ले गए थे
क्रमशः

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