जब अपने ही खास लोग इतना बदल जाते हैं और वे जब परवाह नहीं करते रिश्तों की
अपने स्वार्थ की खातिर वे अपने प्यार को भी एक सुनसान राह बना देते हैं
जैसे कि वे कभी अपने भी थे ये भी बिसरा देते हैं
कुछ अनजाने से और कुछ पहचाने से नजर आते हैं
अपने दिल की पुकार भी अब उनको नहीं सुनाई देती अब वे मेरे दिल की पुकार क्या सुनेंगे
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