खुश रहना भी एक कला है

कोई अकेले ही रहना चाहता है या किसी की अकेले रहने की मजबूरी ही है

कोई भीड़ जोड़ कर उसमे नहीं रहता कुछ दिन बाद वो भीड़ से भी दुखी हो जाता है

भीड़ मे साथ देने वाले बहुत कम होते हैं और तकलीफ देने वाले और तमाशा देखने वाले बहुत होते हैं

इसलिए खुश रहना चाहिए भीड़ से दूर रहना चाहिए

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