देव दासी भाग 546

कामिनी के आज भैया आने वाले है और कुछ समय तक वहां रुकेंगे और कामिनी को अपने साथ ले जाएंगे

कामिनी को कुलदेवी के मोती की माला मिल चुकी थी वो आज से ठाकुर कुल की बहू बन चुकी थी उसे अब वो पद मिल चुका था जिसके लिए कितनी लड़कियां तरसती रहीं ठाकुर वीर सिंह की पत्नी बनने का

और वो रुतबा भी

उधर गीता चिल्ला रहीं थीं वीर सिंह से झगड़ा कर रहीं थीं वीर सिंह और उनकी माँ शांता गीता को पैसे और कपड़े दे रहे थे

गीता वीर सिंह को अपना भाई कहती थी ठाकुर वीर सिंह के घर मे काम करती थी और वही रहती थी उसका कोई नहीं था

कामिनी ने देखा कि एक और लड़की वहां पर खड़ी थी उसकी मांग में सिंदूर था और वह ठाकुर वीर सिंह की ओर देख रहीं थीं

तभी ठाकुर वीर सिंह की माँ ने उस लड़की को वहां से चले जाने को कहा

उस लड़की की आँखों में आंसू बह रहे थे

कामिनी समझ नहीं पा रहीं थीं कि ये सब क्या हो रहा है

और अब भजन का दौर चलने लगा

सारी महिलाये वहां पर आ चुकी थी और कई तरह के वाद्य यंत्र बजा कर भजन गा रहीं थीं

क्रमशः

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें