कामिनी के आज भैया आने वाले है और कुछ समय तक वहां रुकेंगे और कामिनी को अपने साथ ले जाएंगे
कामिनी को कुलदेवी के मोती की माला मिल चुकी थी वो आज से ठाकुर कुल की बहू बन चुकी थी उसे अब वो पद मिल चुका था जिसके लिए कितनी लड़कियां तरसती रहीं ठाकुर वीर सिंह की पत्नी बनने का
और वो रुतबा भी
उधर गीता चिल्ला रहीं थीं वीर सिंह से झगड़ा कर रहीं थीं वीर सिंह और उनकी माँ शांता गीता को पैसे और कपड़े दे रहे थे
गीता वीर सिंह को अपना भाई कहती थी ठाकुर वीर सिंह के घर मे काम करती थी और वही रहती थी उसका कोई नहीं था
कामिनी ने देखा कि एक और लड़की वहां पर खड़ी थी उसकी मांग में सिंदूर था और वह ठाकुर वीर सिंह की ओर देख रहीं थीं
तभी ठाकुर वीर सिंह की माँ ने उस लड़की को वहां से चले जाने को कहा
उस लड़की की आँखों में आंसू बह रहे थे
कामिनी समझ नहीं पा रहीं थीं कि ये सब क्या हो रहा है
और अब भजन का दौर चलने लगा
सारी महिलाये वहां पर आ चुकी थी और कई तरह के वाद्य यंत्र बजा कर भजन गा रहीं थीं
क्रमशः

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