
तीन दोस्त एक पार्क मे रोज आते थे morning वॉक करते थे
और तीनों एक कुर्सी पर बैठते थे जो बड़ी होती है फिर तीनों खूब बाते करते
वे तीनों रिटायर हो चुके थे
लेकिन वो तीनों खूब खुश रहते थे
उनमे से एक दोस्त की पत्नी के देहांत हो गया
तीनों दोस्तों के बच्चे बड़े होकर नौकरी करने लगे थे और वे अपने घर मे रहते थे
जब एक कि पत्नी का देहांत हो गया तो वो दोस्त बहुत दुखी रहने लगा था और अब कुछ दिन बाद उसने पार्क मे आना छोड़ दिया था
तभी एक दोस्त के बेटे की जॉब अमेरिका मे लग गई और उसने अपने माता-पिता का घर बेंच ड़ाला और अपने माता पिता को लेकर विदेश चला गया
अब एक दोस्त बचा वो रोज आता तो था लेकिन अब उसे भी अब पार्क मे नहीं अच्छा लगता था
और अब जब वो अपने दोस्तों को खोजने लगा तो उसे सारे समाचार मिले
वो अपने दोस्त के पास गया जिसकी पत्नि का देहांत हो चुका था लेकिन वो दोस्त उससे कहने लगा कि उसका मन अब पार्क मे नहीं लगता है
वो अब पार्क मे नहीं जाएगा
अब तीसरा दोस्त पार्क मे गया और उस बेंच को देखने लगा और अपने बीते दिनों को याद करने लगा अपने दोस्तों की बातें
अब जब उसके दोस्त वहां नहीं थे तो अब वो भी उस पार्क से चला गया और कभी कभी आता था लेकिन उस बेंच पर बैठने की हिम्मत ना होती
मिलते तो बहुत लोग थे परंतु उस खाली बेंच को कोई ना भर सका
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