कामिनी को वीर सिंह बहुत ही गौर से देखे जा रहे थे उसके चेहरे से नजरे ही नहीं हटा रहे थे लेकिन माँ सब देख लेती है उसे अपने बेटे का बहुत ख्याल है वो कहती हैं कि अब थोड़ी देर मे ही घर चलते हैं
गाना बजाना का सिलसिला चलता है वीर सिंह बाहर चले जाते हैं क्योंकि वो महिला संगीत था उसमे सिर्फ महिलाये ही रहती है
सब महिलाये कामिनी से गाना गाने को कहती हैं कामिनी अपनी सास के मुह की तरफ देखती है और सास के हाँ का इंतजार करती है तभी एक महिला कहती है भाभी गाओ ना
चाची गाने दो ना इसे गाना सास कहती हैं कि बहू गाना सुना दो
कामिनी बहुत सुन्दर भजन गाती है सब कामिनी की तारीफ करती है और अब कामिनी से कहती है कि बहू का नाच भी देखना चाहिए
लेकिन शांता कहती हैं कि अभी तो ये नई नवेली है अभी ये नहीं नाच सकती तुम लोग नाचो अभी
क्रमशः

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