कुहरे की धुंधली सी राह मे वो जा रहा था रोजगार की तलाश मे
उसके छोटे भाई बहन.आशा मे बैठे हुए
माँ को खुशी थी कि आज बेटे को रोजगार मिल गया
लेकिन उस धुंधली सी राह मे वो गया था और रात के अंधेरे मे लौट चुका था
नहीं मिला कोई काम
पछताते हुए घर आ रहा था कि बाप उसे राह लगाते लगाते अपनी जान दे चुका था
अगर वो आज कुछ पढ़ लेता और समय रहते कुछ कर लेता तो आज अपने बाप की दुकान मे ही बैठने लायक हो जाता
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