तबला की थाप

नाचना ही उसका काम था

मन बहलाने का काम वो बख़ूबी जानती थी

लेकिन एक उस दुनिया मे ऐसा आया जिससे वो प्यार कर बैठी

और तबला भी अपने आप बजने लगा जब वो उस महफिल मे आता था

और जी भरकर उससे प्यार जता रहा था क्योंकि उसे तो हसरत उसके जिस्म को पाने की थी

अपनी प्यास बुझाने की थी

लेकिन प्यार मे वो डूबी हुई

एक बच्चे के जन्म की तैयारियां भी कर बैठी थी

लेकिन वो तब तक जा चुका था

डोर अपनी समेट चुका था जिसके प्यार मे वो बंधी थी

उसके चले जाने के बाद डोर भी टूटी और तबला की थाप भी

और उसमे अपने बच्चे का गला उसके जन्म के पहले ही घोट दिया

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