
बहुत प्यार करती थी ना उसे
उसके लिए दिन रात उम्मीद लगाए बैठी थी
त्याग दी थी सारी खुशियां
उसे इंसान बनाने मे
लेकिन उसने क्या दिया तुम्हें जब अपना मतलब निकल गया
जब बस गई उसकी दुनिया
चकनाचूर कर गया
एक माँ को दे गया वो तोहफे मे
अकेलापन
और कुछ दे गया तोहफे में एक नसीहत
फर्ज तो पूरा करो लेकिन उम्मीद मत लगाओ
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