देव दासी भाग 548

कामिनी अब चुपचाप बैठी हुई थी अब शाम हो चुकी थी खाने पीने का सिलसिला शुरू हो चुका था तभी उसे फिर वही महिला दिखी जो कामिनी को बहुत गौर से देख रहीं थीं

धीरे धीरे कामिनी उठने लगी तभी गीता ने कामिनी से कहा आओ भाभी मैं तुम्हें घुमा दूँ लेकिन चाची से पूछना पड़ेगा सारे काम उनकी ही मर्जी से होते हैं वे अगर हाँ कहती हैं तो हाँ अगर वे ना कह दें तो ना

अब गीता शांता से पूछती है कि चाची क्या भाभी को मैं थोड़ी देर घुमा लाऊँ

बहुत परेशान हो गई है भाभी

अच्छा चलो आप पंडित जी के पास चलो वे आपको बुला रहे हैं शायद कुछ दान दक्षिणा बाकी है और शांता पंडित जी के पास चली है

तभी गीता कामिनी से कहती है कि भाभी चलो तुम्हें कुछ दिखाती हू बाग है यहां मोर वाले

यहां मोर बहुत आते हैं अब शाम हो गई है जल्दी से देख लो यहा बार बार आने को नहीं मिलेगा अभी चाची पंडित जी से बात कर रहीं हैं पंडित जी बहुत बातूनी हैं

क्रमशः

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