
धैर्य छोड़ देता है कभी कभी जब समय साथ नहीं देता लेकिन अपने धैर्य को फिर से रोकना पड़ता है और आगे बढ़ना होता है समय भी दाद देता है अपनी
जब नैन भीग जाते हैं किसी के अनगिनत तानों से तो एक ही धुन सुनाई देती है कि भीगे हुए नैनो को पोंछ कर फिर से नए जीवन की कामना करो
कल से फिर नया प्रभात होगा तुम किस्मत वाले हो जो कल का प्रभात देखोगे
सूर्य भी अपनी गतियों को बदल देता है जब उसपर काले बादल छाते है तो क्या वह चमकना छोडकर चला नहीं जाता वो भी काबू रखता है अपने भीगे हुए नयनो पर अंकुश रखता है अपने धैर्य पर
और फिर चमक जाता है धुंधले बादल आगे की ओर बढ़ जाते हैं
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